🇮🇳 शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी
खामोशियों के दरमियां, तेरे लबों की ये हंसी मेरी हर मुराद में,
हर ग़म को मिटा रहा है, कि खुदा से अब कोई और दुआ माँगना बाकी नहीं। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 763]
हर ग़म को मिटा रहा है, कि खुदा से अब कोई और दुआ माँगना बाकी नहीं। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 763]