🇮🇳 ४ लाइन शायरी (रुबाई)
मेरे हमदम, तेरी मोहब्बत की खुशबू मेरी सूनी रातों में,
हर ग़म को मिटा रहा है, कि तेरी एक हंसी पे हम अपनी जान भी निसार कर दें। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 930]
हर ग़म को मिटा रहा है, कि तेरी एक हंसी पे हम अपनी जान भी निसार कर दें। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 930]