🇮🇳 बेवफा शायरी इन हिंदी
ऐ सनम, सिसकती हुई सांसों का ये आलम मेरी यादों के खंडहर में,
चेहरे की मुस्कान छीन रहा है, कि यादों के सहारे ही ये कड़वी ज़िंदगी काटनी पड़ी। [बेवफा शायरी इन हिंदी 740]
चेहरे की मुस्कान छीन रहा है, कि यादों के सहारे ही ये कड़वी ज़िंदगी काटनी पड़ी। [बेवफा शायरी इन हिंदी 740]