🇮🇳 दर्द भरी और तन्हाई शायरी
ज़िंदगी के सफर में, सिसकती हुई सांसों का ये आलम मेरी तकदीर के अंधेरों में,
जीते जी मौत का अहसास दे रहा है, कि खुशियों की तलाश में सिर्फ ग़म ही ग़म हाथ लगे। [दर्द भरी और तन्हाई शायरी 740]
जीते जी मौत का अहसास दे रहा है, कि खुशियों की तलाश में सिर्फ ग़म ही ग़म हाथ लगे। [दर्द भरी और तन्हाई शायरी 740]