🇮🇳 दर्द भरी और तन्हाई शायरी
हर घड़ी, वक्त की बेदर्द और बेरहम मार मेरी भीगी आँखों में,
आंसुओं का सैलाब ला रहा है, कि किसी को अपना बनाकर खोना बहुत ज्यादा दर्द देता है। [दर्द भरी और तन्हाई शायरी 857]
आंसुओं का सैलाब ला रहा है, कि किसी को अपना बनाकर खोना बहुत ज्यादा दर्द देता है। [दर्द भरी और तन्हाई शायरी 857]