🇮🇳 रॉयल ऐटिट्यूड शायरी
हर घड़ी, हमारी शख्सियत का ये भारी वजन खुले आसमान के नीचे,
अपना भारी खौफ और असर छोड़ रहा है, कि हम झुकते नहीं, ज़माने को झुकाने का पूरा दम रखते हैं।
तेरी चाहत में हर इम्तिहान से गुज़र जाना है,
तुझे ही अपनी ज़िंदगी का सच्चा मक़सद बनाना है।
अपना भारी खौफ और असर छोड़ रहा है, कि हम झुकते नहीं, ज़माने को झुकाने का पूरा दम रखते हैं।
तेरी चाहत में हर इम्तिहान से गुज़र जाना है,
तुझे ही अपनी ज़िंदगी का सच्चा मक़सद बनाना है।