🇮🇳 बेवफा शायरी इन हिंदी
ज़माने से कह दो, दिल में दफन अनकहे फ़साने मेरे सीने के अंदर,
उम्र भर का नासूर बन गया है, कि अब रोते हुए भी मुस्कुराना हमारी मजबूरी बन गई। [बेवफा शायरी इन हिंदी 898]
उम्र भर का नासूर बन गया है, कि अब रोते हुए भी मुस्कुराना हमारी मजबूरी बन गई। [बेवफा शायरी इन हिंदी 898]