🇮🇳 शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी
अक्सर, तेरे हुस्न का ये दीदार मेरी सूनी रातों में,
दिल को दीवाना बना रहा है, कि तेरी बाहों का ये आशियाना ही मेरी सच्ची जन्नत है। [शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी 604]
दिल को दीवाना बना रहा है, कि तेरी बाहों का ये आशियाना ही मेरी सच्ची जन्नत है। [शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी 604]