🇮🇳 दर्द भरी और तन्हाई शायरी
यूं तो, उम्मीदों के टूटने की ये सदा मेरी उदासियों के आलम में,
इस कदर चुभ रहा है हर पल, कि अब रोते हुए भी मुस्कुराना हमारी मजबूरी बन गई। [दर्द भरी और तन्हाई शायरी 934]
इस कदर चुभ रहा है हर पल, कि अब रोते हुए भी मुस्कुराना हमारी मजबूरी बन गई। [दर्द भरी और तन्हाई शायरी 934]