🇮🇳 शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी
ऐ दोस्त, तेरी बाहों का ये आशियाना मेरे रोम-रोम के अहसास में,
बेपनाह सुकून दे रहा है, कि अब तेरे इश्क में ही जीना और मरना मंजूर है। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 122]
बेपनाह सुकून दे रहा है, कि अब तेरे इश्क में ही जीना और मरना मंजूर है। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 122]