🇮🇳 बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी
कसम से, टूटे हुए दिल का ये दर्द मेरी तन्हाई की महफ़िल में,
सांसों को भारी कर रहा है, कि अब किसी पर भी ऐतबार करना नामुमकिन हो गया। [बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी 718]
सांसों को भारी कर रहा है, कि अब किसी पर भी ऐतबार करना नामुमकिन हो गया। [बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी 718]