ग़ज़ल और नज़्म
यूं तो, तेरे साथ बिताया हर पल मेरी खामोश इबादतों में,
कुछ इस तरह समाया हुआ है, कि अब तेरे बिना एक पल भी गवारा नहीं होता।
कुछ इस तरह समाया हुआ है, कि अब तेरे बिना एक पल भी गवारा नहीं होता।