बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी
खामोशियों के दरमियां, दिल के अरमानों का ये जनाज़ा मेरी खामोश रातों में,
अंदर ही अंदर जला रहा है, कि खुशियों की तलाश में सिर्फ ग़म ही ग़म हाथ लगे।
अंदर ही अंदर जला रहा है, कि खुशियों की तलाश में सिर्फ ग़म ही ग़म हाथ लगे।