बेवफा शायरी इन हिंदी
हर घड़ी, आँखों से बहते अश्कों का दरिया मेरे खामोश आशियाने में,
ज़िंदगी को वीरान कर रहा है, कि कांच की तरह टूटकर बिखर गए हमारे सारे अरमान। [बेवफा शायरी इन हिंदी 847]
ज़िंदगी को वीरान कर रहा है, कि कांच की तरह टूटकर बिखर गए हमारे सारे अरमान। [बेवफा शायरी इन हिंदी 847]