बेवफा शायरी इन हिंदी
ऐ दोस्त, वक्त की बेदर्द और बेरहम मार मेरी भीगी आँखों में,
अंधेरों में धकेल रहा है, कि दिल के ज़ख्मों को छिपाकर मुस्कुराना ही दस्तूर बन गया। [बेवफा शायरी इन हिंदी 817]
अंधेरों में धकेल रहा है, कि दिल के ज़ख्मों को छिपाकर मुस्कुराना ही दस्तूर बन गया। [बेवफा शायरी इन हिंदी 817]