दर्द भरी और तन्हाई शायरी

मेरे हमदम, आंसुओं में भीगी ये पलकें मेरी सांसों की चुभन में,
अंधेरों में धकेल रहा है, कि किसी को अपना बनाकर खोना बहुत ज्यादा दर्द देता है। [दर्द भरी और तन्हाई शायरी 801]

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📖 शेर का अर्थ व भावार्थ (Explanation & Meaning)

दर्द भरी और तन्हाई शायरी का यह अद्वितीय शेर दिल की गहराइयों और सच्चे जज़्बातों को बहुत ही खूबसूरती से व्यक्त करता है।

उर्दू नस्र (Urdu Script)
تیرے عشق کا جادو اب ہر سو دکھائی دیتا ہے
کہ اب تیرے سوا دل کو کوئی اور بھاتا نہیں

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ऐ सनम, अपनों के दिए हुए दर्दनाक घाव मेरे सीने के अंदर,
सांसों को भारी कर रहा है, कि अब रोते हुए भी मुस्कुराना हमारी मजबूरी बन गई। [दर्द भरी और तन्हाई शायरी 950]
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— अहमद फ़राज़ पूरा पढ़ें →
ऐ सनम, सिसकती हुई सांसों का ये आलम मेरी यादों के खंडहर में,
अंदर ही अंदर जला रहा है, कि खुशियों की तलाश में सिर्फ ग़म ही ग़म हाथ लगे। [दर्द भरी और तन्हाई शायरी 900]
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