दर्द भरी और तन्हाई शायरी

ऐ सनम, अपनों के दिए हुए दर्दनाक घाव मेरे सीने के अंदर,
सांसों को भारी कर रहा है, कि अब रोते हुए भी मुस्कुराना हमारी मजबूरी बन गई। [दर्द भरी और तन्हाई शायरी 950]

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📖 शेर का अर्थ व भावार्थ (Explanation & Meaning)

दर्द भरी और तन्हाई शायरी का यह अद्वितीय शेर दिल की गहराइयों और सच्चे जज़्बातों को बहुत ही खूबसूरती से व्यक्त करता है।

उर्दू नस्र (Urdu Script)
تیرے عشق کا جادو اب ہر سو دکھائی دیتا ہے
کہ اب تیرے سوا دل کو کوئی اور بھاتا نہیں

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खामोशियों के दरमियां, दिल में दफन अनकहे फ़साने मेरी तन्हाई की महफ़िल में,
उम्र भर का नासूर बन गया है, कि अब किसी पर भी ऐतबार करना नामुमकिन हो गया। [दर्द भरी और तन्हाई शायरी 618]
— अहमद फ़राज़ पूरा पढ़ें →
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अंदर ही अंदर जला रहा है, कि खुशियों की तलाश में सिर्फ ग़म ही ग़म हाथ लगे। [दर्द भरी और तन्हाई शायरी 900]
— मीर तक़ी मीर पूरा पढ़ें →
सच है, अधूरे ख्वाबों का ये बिखरा मंज़र मेरे खामोश आशियाने में,
नासूर बनकर रिस रहा है, कि कांच की तरह टूटकर बिखर गए हमारे सारे अरमान।
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