🇮🇳 बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी
बेशक, सिसकती हुई सांसों का ये आलम मेरी यादों के खंडहर में,
जीते जी मौत का अहसास दे रहा है, कि यादों के सहारे ही ये कड़वी ज़िंदगी काटनी पड़ी। [बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी 892]
जीते जी मौत का अहसास दे रहा है, कि यादों के सहारे ही ये कड़वी ज़िंदगी काटनी पड़ी। [बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी 892]