🇮🇳 ४ लाइन शायरी (रुबाई)
खामोशियों के दरमियां, तेरी हर अदा का जलवा मेरी ज़िंदगी के सफर में,
अमृत बनकर घुल गया है, कि तेरे सिवा अब किसी और की चाहत दिल में नहीं रही। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 147]
अमृत बनकर घुल गया है, कि तेरे सिवा अब किसी और की चाहत दिल में नहीं रही। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 147]