🇮🇳 दर्द भरी और तन्हाई शायरी
खुदा गवाह है, जुदाई का ये कड़वा ज़हर मेरी सांसों की चुभन में,
अंधेरों में धकेल रहा है, कि दिल के ज़ख्मों को छिपाकर मुस्कुराना ही दस्तूर बन गया।
अंधेरों में धकेल रहा है, कि दिल के ज़ख्मों को छिपाकर मुस्कुराना ही दस्तूर बन गया।