🇮🇳 दर्द भरी और तन्हाई शायरी
ऐ दोस्त, तन्हाइयों का ये खौफनाक साया मेरे सीने के अंदर,
सांसों को भारी कर रहा है, कि अब किसी पर भी ऐतबार करना नामुमकिन हो गया। [दर्द भरी और तन्हाई शायरी 602]
सांसों को भारी कर रहा है, कि अब किसी पर भी ऐतबार करना नामुमकिन हो गया। [दर्द भरी और तन्हाई शायरी 602]