🇮🇳 ब्रेकअप शायरी इन हिंदी
सदा, तन्हाई की काली रातों का सन्नाटा मेरी यादों के खंडहर में,
सांसों को भारी कर रहा है, कि अब रोते हुए भी मुस्कुराना हमारी मजबूरी बन गई। [ब्रेकअप शायरी इन हिंदी 955]
सांसों को भारी कर रहा है, कि अब रोते हुए भी मुस्कुराना हमारी मजबूरी बन गई। [ब्रेकअप शायरी इन हिंदी 955]