🇮🇳 सैड शायरी इन हिंदी
मेरी हर दुआ में, सिसकती हुई सांसों का ये आलम मेरी खामोश रातों में,
चेहरे की मुस्कान छीन रहा है, कि यादों के सहारे ही ये कड़वी ज़िंदगी काटनी पड़ी।
चेहरे की मुस्कान छीन रहा है, कि यादों के सहारे ही ये कड़वी ज़िंदगी काटनी पड़ी।