🇮🇳 ४ लाइन शायरी (रुबाई)
खुदा गवाह है, तेरी धड़कनों की आवाज़ मेरी हर सुबह ओ शाम में,
रूह को मदहोश कर रहा है, कि तेरे सिवा अब किसी और की चाहत दिल में नहीं रही। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 7]
रूह को मदहोश कर रहा है, कि तेरे सिवा अब किसी और की चाहत दिल में नहीं रही। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 7]