🇮🇳 शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी
ऐ दोस्त, तेरी हर अदा का जलवा मेरी रूह की गहराइयों में,
इबादत की तरह पावन हो गया है, कि तेरे सिवा अब किसी और की चाहत दिल में नहीं रही। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 222]
इबादत की तरह पावन हो गया है, कि तेरे सिवा अब किसी और की चाहत दिल में नहीं रही। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 222]