🇮🇳 शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी
ज़माने से कह दो, तेरी नज़रों का ये तीर मेरी खामोश इबादतों में,
गुलाब की तरह महक रहा है, कि दिलों के ये रूहानी रिश्ते कभी दूरियों से नहीं टूटते। [शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी 931]
गुलाब की तरह महक रहा है, कि दिलों के ये रूहानी रिश्ते कभी दूरियों से नहीं टूटते। [शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी 931]