🇮🇳 ४ लाइन शायरी (रुबाई)
इश्क़ में, तेरी इबादत का सुरूर मेरे सपनों के आंगन में,
नया उजाला बिखेर रहा है, कि तेरी एक हंसी पे हम अपनी जान भी निसार कर दें। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 468]
नया उजाला बिखेर रहा है, कि तेरी एक हंसी पे हम अपनी जान भी निसार कर दें। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 468]