🇮🇳 ४ लाइन शायरी (रुबाई)
ऐ सनम, तेरी चाहत का नशा मेरी तकदीर के पन्नों पर,
मेरी पहचान बन चुका है, कि तेरी एक हंसी पे हम अपनी जान भी निसार कर दें। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 104]
मेरी पहचान बन चुका है, कि तेरी एक हंसी पे हम अपनी जान भी निसार कर दें। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 104]