🇮🇳 बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी
यकीन मानो, रोते हुए दिल की ये बेबसी मेरे खामोश आशियाने में,
कांच की तरह बिखर रहा है, कि अब तन्हाइयों से ही दिल लगाना सीख लिया हमने। [बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी 987]
कांच की तरह बिखर रहा है, कि अब तन्हाइयों से ही दिल लगाना सीख लिया हमने। [बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी 987]