🇮🇳 शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी
हां, तेरी नज़रों का ये तीर मेरी खामोश इबादतों में,
गुलाब की तरह महक रहा है, कि अब तेरे इश्क में ही जीना और मरना मंजूर है। [शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी 195]
गुलाब की तरह महक रहा है, कि अब तेरे इश्क में ही जीना और मरना मंजूर है। [शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी 195]