🇮🇳 शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी
हकीकत यही है, तेरी ज़ुल्फ़ों की हसीन छांव मेरी सूनी रातों में,
मेरी पहचान बन चुका है, कि तेरी बाहों का ये आशियाना ही मेरी सच्ची जन्नत है। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 433]
मेरी पहचान बन चुका है, कि तेरी बाहों का ये आशियाना ही मेरी सच्ची जन्नत है। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 433]