🇮🇳 ४ लाइन शायरी (रुबाई)
सुनो, तेरी वफाओं का ये समंदर मेरी खामोश इबादतों में,
हर पल नया रंग भर रहा है, कि तू ही मेरी पहली और आखरी मंजिल बन चुकी है। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 249]
हर पल नया रंग भर रहा है, कि तू ही मेरी पहली और आखरी मंजिल बन चुकी है। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 249]