🇮🇳 रॉयल ऐटिट्यूड शायरी
अक्सर, हमारी शख्सियत का ये भारी वजन शहर की हर गली और चौराहे पर,
शेर की तरह दहाड़ रहा है, कि हम झुकते नहीं, ज़माने को झुकाने का पूरा दम रखते हैं।
शेर की तरह दहाड़ रहा है, कि हम झुकते नहीं, ज़माने को झुकाने का पूरा दम रखते हैं।