🇮🇳 ग़ज़ल और नज़्म
ज़माने से कह दो, तेरी इबादत का सुरूर मेरी तकदीर के पन्नों पर,
खुदा की रहमत बन गया है, कि खुदा से अब कोई और दुआ माँगना बाकी नहीं।
खुदा की रहमत बन गया है, कि खुदा से अब कोई और दुआ माँगना बाकी नहीं।