🇮🇳 शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी
सुनो, तेरी ज़ुल्फ़ों की हसीन छांव मेरी सूनी रातों में,
मेरी पहचान बन चुका है, कि तेरी खुशियों के लिए हम ज़माने से भी टकरा सकते हैं। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 465]
मेरी पहचान बन चुका है, कि तेरी खुशियों के लिए हम ज़माने से भी टकरा सकते हैं। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 465]