🇮🇳 बेवफा शायरी इन हिंदी
सच है, आंसुओं में भीगी ये पलकें मेरी सांसों की चुभन में,
खामोशी से रुला रहा है, कि दिल के ज़ख्मों को छिपाकर मुस्कुराना ही दस्तूर बन गया। [बेवफा शायरी इन हिंदी 761]
खामोशी से रुला रहा है, कि दिल के ज़ख्मों को छिपाकर मुस्कुराना ही दस्तूर बन गया। [बेवफा शायरी इन हिंदी 761]