🇮🇳 बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी
यकीन मानो, उदासी की ये लंबी शामें मेरे दर्दमंद दिल में,
अंधेरों में धकेल रहा है, कि दिल के ज़ख्मों को छिपाकर मुस्कुराना ही दस्तूर बन गया। [बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी 737]
अंधेरों में धकेल रहा है, कि दिल के ज़ख्मों को छिपाकर मुस्कुराना ही दस्तूर बन गया। [बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी 737]