🇮🇳 सैड शायरी इन हिंदी
ज़िंदगी के सफर में, दिल में दफन अनकहे फ़साने मेरी तन्हाई की महफ़िल में,
उम्र भर का नासूर बन गया है, कि अब रोते हुए भी मुस्कुराना हमारी मजबूरी बन गई। [सैड शायरी इन हिंदी 954]
उम्र भर का नासूर बन गया है, कि अब रोते हुए भी मुस्कुराना हमारी मजबूरी बन गई। [सैड शायरी इन हिंदी 954]