🇮🇳 सैड शायरी इन हिंदी
हर घड़ी, सिसकती हुई सांसों का ये आलम मेरी तकदीर के अंधेरों में,
जीते जी मौत का अहसास दे रहा है, कि खुशियों की तलाश में सिर्फ ग़म ही ग़म हाथ लगे। [सैड शायरी इन हिंदी 896]
जीते जी मौत का अहसास दे रहा है, कि खुशियों की तलाश में सिर्फ ग़म ही ग़म हाथ लगे। [सैड शायरी इन हिंदी 896]