🇮🇳 बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी
खुदा गवाह है, मोहब्बत में मिले धोखे का नासूर मेरी वीरान ज़िंदगी में,
नासूर बनकर रिस रहा है, कि अब तन्हाइयों से ही दिल लगाना सीख लिया हमने। [बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी 691]
नासूर बनकर रिस रहा है, कि अब तन्हाइयों से ही दिल लगाना सीख लिया हमने। [बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी 691]