🇮🇳 शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी
दिल की गहराइयों से, तेरी पाकीज़ा वफ़ा का साया मेरे दिल की धड़कनों में,
कुछ इस तरह समाया हुआ है, कि तू ही मेरी पहली और आखरी मंजिल बन चुकी है। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 436]
कुछ इस तरह समाया हुआ है, कि तू ही मेरी पहली और आखरी मंजिल बन चुकी है। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 436]