🇮🇳 बेवफा शायरी इन हिंदी
कसम से, सिसकती हुई सांसों का ये आलम मेरी तकदीर के अंधेरों में,
अंदर ही अंदर जला रहा है, कि यादों के सहारे ही ये कड़वी ज़िंदगी काटनी पड़ी।
अंदर ही अंदर जला रहा है, कि यादों के सहारे ही ये कड़वी ज़िंदगी काटनी पड़ी।