🇮🇳 दर्द भरी और तन्हाई शायरी
यकीन मानो, उम्मीदों के टूटने की ये सदा मेरे सीने के अंदर,
सांसों को भारी कर रहा है, कि अब किसी पर भी ऐतबार करना नामुमकिन हो गया।
सांसों को भारी कर रहा है, कि अब किसी पर भी ऐतबार करना नामुमकिन हो गया।