🇮🇳 २ लाइन बेस्ट शायरी
मेरे हमदम, तेरी मासूमियत का ये अंदाज़ मेरे सपनों के आंगन में,
हर ग़म को मिटा रहा है, कि खुदा से अब कोई और दुआ माँगना बाकी नहीं।
हर ग़म को मिटा रहा है, कि खुदा से अब कोई और दुआ माँगना बाकी नहीं।