🇮🇳 ४ लाइन शायरी (रुबाई)
हर घड़ी, तेरे इश्क का पावन रंग मेरी सूनी रातों में,
हर ग़म को मिटा रहा है, कि खुदा से अब कोई और दुआ माँगना बाकी नहीं। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 786]
हर ग़म को मिटा रहा है, कि खुदा से अब कोई और दुआ माँगना बाकी नहीं। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 786]