🇮🇳 ४ लाइन शायरी (रुबाई)
यूं तो, तेरी मासूमियत का ये अंदाज़ मेरी तकदीर के पन्नों पर,
मेरी पहचान बन चुका है, कि तेरे मुस्कुराने से ही मेरी ये पूरी कायनात मुकम्मल है। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 88]
मेरी पहचान बन चुका है, कि तेरे मुस्कुराने से ही मेरी ये पूरी कायनात मुकम्मल है। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 88]