🇮🇳 ग़ज़ल और नज़्म
तेरी हर अदा का जलवा मेरी हर सुबह ओ शाम में,
हर पल नया रंग भर रहा है, कि तेरे सिवा अब किसी और की चाहत दिल में नहीं रही।
हर पल नया रंग भर रहा है, कि तेरे सिवा अब किसी और की चाहत दिल में नहीं रही।