🇮🇳 ४ लाइन शायरी (रुबाई)
खामोशियों के दरमियां, तेरी चाहत का नशा मेरी तकदीर के पन्नों पर,
मेरी पहचान बन चुका है, कि खुदा से अब कोई और दुआ माँगना बाकी नहीं। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 72]
मेरी पहचान बन चुका है, कि खुदा से अब कोई और दुआ माँगना बाकी नहीं। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 72]